काव्यांश (कवि - रसखान)

 प्रेम-प्रेम सोउ कहत, प्रेम न जानत कोय

1.    प्रेम अयनि श्रीराधिका, प्रेम-बरन…

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 राधामाधव सखिन संग, बिहरत कुंज कुटीर

1.    जो जातें जामें बहुरि जा हित…

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अति सूछम कोमल अतिहि, अति पतरो अति दूर

1.    अति सूछम कोमल अतिहि, अति पतरो…

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अन्त तें न आयो याही गाँवरे को जायो

अन्त तें न आयो याही गाँवरे को जायो,
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आई खेलि होरी ब्रजगोरी वा किसोरी संग

आई खेलि होरी ब्रजगोरी वा किसोरी संग
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आई हौ आज नई ब्रज में कछु नैन नचाइ कैं रार मचैहौ

आई हौ आज नई ब्रज में कछु नैन नचाइ कैं रार मचैहौ। Read More

आजु गई हुती भोरही हौं

आजु गई हुती भोरही हौं रसखानि रई कहि नन्द के भौंनहिं। Read More

आवत हौ रस के चसके तुम जानत हौ रस होत कहा हो

आवत हौ रस के चसके तुम जानत हौ रस होत कहा हो। Read More

एरी आजु काल्हि सब लोक लाज त्यागि दोऊ

एरी आजु काल्हि सब लोक लाज त्यागि दोऊ
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एरी कहा बृषभानपुरा की तौ दान दियें बिन जान न पैहौ

एरी कहा बृषभानपुरा की तौ दान दियें बिन जान न पैहौ। Read More

कल कानन कुण्डल मोरपखा

कल कानन कुण्डल मोरपखा उर पैं बनमाल बिराजति है। Read More

कहा रसखानि सुखसंपति सुमार कहा

कहा रसखानि सुखसंपति सुमार कहा,
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कानन दै अँगुरी रहिबो

कानन दै अँगुरी रहिबो जबहीं मुरली धुनि मन्द बजैहै। Read More

कान्ह भए बस बाँसुरी के

कान्ह भए बस बाँसुरी के अब कौन सखी हमकों चहिहै। Read More

कौन ठगौरी भरी हरि आजु

कौन ठगौरी भरी हरि आजु बजाई है बाँसुरिया रंग भीनी। Read More

खंजन नैन फँसे पिंजरा

खंजन नैन फँसे पिंजरा छवि नाहि रहै थिर कैसहूँ माई। Read More

खेलत फाग सुहाग भरी

खेलत फाग सुहाग भरी अनुरागहिं लालन कों धरि कै। Read More

गारी के देवैया बनवारी तुम कहौ कौन

गारी के देवैया बनवारी तुम कहौ कौन
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गोकुल को ग्वाल काल्हि चौमुँह की ग्वालिन सौं

गोकुल को ग्वाल काल्हि चौमुँह की ग्वालिन सौं Read More

गोरज बिराजै भाल लहलही बनमाल

गोरज बिराजै भाल लहलही बनमाल
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छछिया भरि छाछ पै नाच नचावत

गावैं गुनी गनिका गन्धर्ब औ सारद सेस सबै गुन गावत। Read More

छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं

सेस गनेस महेस दिनेस सुरेसहु जाहि निरन्तर गावैं। Read More

छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं

शंकर से सुर जाहि भजैं चतुरानन ध्यान में धर्म बढ़ावैं। Read More

छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं

लाय समाधि रहे बरम्हादिक जोगी भये पर अन्त न पावैं। Read More

छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं

गुंज गरें सिर मोरपखा अरु चाल गयंद की मो मन भावै। Read More

छूट्यौ गृह काज लोक लाज मनमोहन कै

छूट्यौ गृह काज लोक लाज मनमोहन कै
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जल की न घट भरैं मग की न पग धरैं

जल की न घट भरैं मग की न पग धरैं
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जा दिन तें निरख्यो नन्दनन्दन

जा दिन तें निरख्यो नन्दनन्दन कानि तजी घर बन्धन…

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जा दिन तें वह नन्द को छोहरो

जा दिन तें वह नन्द को छोहरो या बन धेनु चराइ गयो…

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जातें उपजत प्रेम सोइ, बीज कहावत प्रेम

1.    स्वारथमूल अशुद्ध त्यों, शुद्ध…

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जोहौं मैं तिहारी ओर नन्दगाँव के किसोर

जोहौं मैं तिहारी ओर नन्दगाँव के किसोर
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तोहूँ पहिचानौं बृषभान हूँ को जानौं नेकु

तोहूँ पहिचानौं बृषभान हूँ को जानौं नेकु
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दान पै न कान सुने लैहों सो गुमान भंजि

दान पै न कान सुने लैहों सो गुमान भंजि
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धूर भरे अति शोभित स्याम जू

धूर भरे अति शोभित स्याम जू तैसी बनी सिर सुन्दर…

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नन्द की न दासी हम जातिहू मैं नाही कम

नन्द की न दासी हम जातिहू मैं नाही कम
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नैन लख्यो जब कुंजन तें

नैन लख्यो जब कुंजन तें वन तें निकस्यो अँटक्यो मटक्यो…

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नौ लख गाय सुनी हम नन्द के तापर दूध दही न अघाने

नौ लख गाय सुनी हम नन्द के तापर दूध दही न अघाने। Read More

बंक बिलोकनि है दुखमोचन

बंक बिलोकनि है दुखमोचन दीरघ लोचन रंग भरे हैं। Read More

बजी है बजी रसखानि बजी

बजी है बजी रसखानि बजी सुनिकै अब गोपकुमारि न जीहै। Read More

ब्याही अनब्याही ब्रजमाहीं सब चाही तासों

ब्याही अनब्याही ब्रजमाहीं सब चाही तासों
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भौंह भरी बरुनी सुथरी

भौंह भरी बरुनी सुथरी अतिसै अधरानि रंगी रंग रातौ। Read More

मानुष हौं तो वही रसखानि

मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के…

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मेरो को करै नियाब हौं तो तीनि लोक राव

मेरो को करै नियाब हौं तो तीनि लोक राव
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मैन मनोहर बैन बजै

मैन मनोहर बैन बजै सु सजे तन सोहत पीत पटा है। Read More

मो मन मानिक लै गयो

1.    मो मन मानिक लै गयो, चितै चोर…

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मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं

मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं गुंज की माल गरें पहिरौंगी। Read More

या लकुटी अरु कामरिया

या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं। Read More

लोक की लाज तजी तबहीं

लोक की लाज तजी तबहीं जब देख्यो सखी ब्रजचन्द सलोनो। Read More

संभु धरै ध्यान जाको जपत जहान सब

संभु धरै ध्यान जाको जपत जहान सब
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सुनिकै यह बात हियें गुनि कै तब बोलि उठि बृषभान-लली

सुनिकै यह बात हियें गुनि कै तब बोलि उठि बृषभान-लली। Read More

सोहत है चँदवा सिर मौर

सोहत है चँदवा सिर मौर के जैसियै सुन्दर पाग कसी…

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हरि के सब आधीन, पै हरी प्रेम-आधीन

1.    हरि के सब आधीन, पै हरी प्रेम-आधीन। Read More