प्रसिद्ध गद्यांश

नवीन गद्यांश

आलोचना की संस्कृति और संस्कृति की आलोचना

’आलोचना की संस्कृति’ को ठीक से समझने के लिए संस्कृति की आलोचना जरूरी है और संस्कृति की…

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आलोचना की स्वायत्तता

आलोचना की भाषा शून्य में निर्मित नहीं होती; वह पहले ही से विविध सांस्कृतिक परतों से छनती हुई आती…

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आलोचना की भाषा

अपने सर्जनात्मक रूप में आलोचना-कर्म मूलतः व्यक्तिगत प्रयास है, क्योंकि किसी कृति-संबंधी प्रत्येक…

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चल मोरवा बारात रे

हमारे साहित्य में ’आत्मा’ का प्रतीक ’हंस’ माना गया है तो ’मन’…

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