स्वेद-सलिलु, रोमांच-कुसु गहि दुलही अरु नाथ

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1.    स्वेद-सलिलु, रोमांच-कुसु गहि दुलही अरु नाथ।
       दियौ हियौ सँग हाथ कैं हथलेय हीं हाथ।। 


2.    नख-रुचि-चूरनु डारि कै, ठगि, लगाइ, निज साथ।
       रह्यौ राखि हठि लै गए हथाहथी मनु हाथ।।  
 

पुस्तक | बिहारी सतसई कवि | बिहारीलाल भाषा | ब्रजभाषा रचनाशैली | मुक्तक छंद | दोहा